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Saturday, December 19, 2009

देखो न! यह मेरी कैसी तक़दीर है,
न तुम हो न तुम्हारी कोई तस्वीर है,
दिन-रात तेरा ग़म ही ग़म है मुझे,
सीने में साँसों की टूटी हुई ज़ंजीर है...!

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